ये कैलाश सत्यार्थी जी के नोबल पुरस्कार ने मेरे मन में कुछ सवाल पैदा कर दिए हैं.....
राष्ट्रीय सम्मान - न भारत रत्न , न पद्मश्री न कोई और राष्ट्रीय सम्मान, कैलाश जी कुल मिलकर १३ या उससे ज्यादा बार पुरस्कृत हो चुके है लेकिन हर बार विभिन्न देशों के द्वारा.. क्यूँ हम वो नहीं देख सके जो बहरी देशों को दिख गया ?
राजनीति - क्या भारतवर्ष में इतने महवपूर्ण कार्य की कोई प्रसंगिगता नहीं है ? या उनके कार्यो को सम्मानित करना हमारे राजनैतिक प्रतिनिधियों के लिए कभी महत्ता का विषय नहीं बन सका ?
मीडिया - शाहरुख़ - सलमान की आपसी लड़ाई और मित्रता को राष्ट्रीय प्रसंग बनाने वाली हमारी मीडिया सामाजिक उन्नति, सामाजिक समरसता के कार्यों, बालश्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर पिछले तीन दशक से भी ज्यादा से कार्य करने के बाद भी हिंदुस्तानी मीडिया को वो दिखाई नहीं दिए...
नोबल पुरस्कार मिला है उन्हें अब उनसे जुडी ख़बरें मसाला बन गई है **** भी बढ़ेगी और पाठकसंख्या भी तो आज के कुछ राष्ट्रीय समाचारपत्रों ने पूरा एक पृष्ठ उनके कार्यों को उनके जीवन को प्रदर्शित करने में दिया... कुछ समाचार चैनलों ने आज विशेष कार्यक्रम उनके नाम पे चलाया कुछ आज से कल तक चला देंगे... अरे हमसे तो अच्छा पाकिस्तानी मीडिया है जो इतने अव्यवस्थित देश में होने के बाद भी मलाला यूसुफजई को उन्होंने एक प्रेरणा के रूप में प्रदर्शित किया और संपूर्ण विश्व को उनके बारे में समय-२ पर अवगत भी कराया...
आज की ही एक बात और लेलें चलो हमारे पूर्व राष्ट्रपति महोदय कलाम साहब पिछले १० दिनों से अस्वस्थ है स्थिति गंभीर है लेकिन मसला ये है कि अब वो समाचार चैनलों- पत्रो की प्राथमिकता से पर जा चुके हैं इसलिए मीडिया में कोई खबर नहीं..
हमारे देश में अभी ऐसे कई कैलाश छिपे हुए है.. उन छुपे हुए लोगों को उनके अच्छे कामों को बहार लाइए... उनको सम्मान दीजिये... उनको आम जनता से जोड़िये... ताकि उनके द्वारा किये जा रहे कामों में योगदान करके अन्य भारतीय भी गर्व महसूस करें...
हमें एक माहौल बनाना होगा... मीडिया का चरित्र राष्ट्र के चरित्र का धोतक होता है... आज बदलते वक़्त के साथ हमारी मीडिया को भी बदलना होगा.. मीडिया का काम आज सिर्फ खबरे पहुचने का नहीं है बल्कि समाज को दिशा देने का है, दशा सुधारने का है..
कलाम साहब भी हमेशा मीडिया के सकारात्मक - रचनात्मक स्वरुप के प्रबल समर्थक रहे हैं..
मीडिया को अपनी शक्ति के प्रभावी, क्रियात्मक, समुचित और संतुलित इस्तेमाल की दिशानिर्देशित करे,
राजनीतिज्ञ अपना व्यक्तित्व एवं आचरण मर्यादित रखें, मानवतावाद, राष्ट्रीय हितों एवं सामाजिक विकास की नीतियों में योगदान अन्य कार्यों से पहले और प्राथमिकतापूर्व हो .
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